कोणार्क मंदिर एक रहस्य
नियुक्ति की गई विशेषज्ञों की टीम और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के हालिया प्रयासों के अनुसार, ओडिशा के विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के गर्भगृह (Jagamohana) को लेकर एक ऐतिहासिक प्रक्रिया चल रही है। इस खबर की विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है: 1. रेत निकालने की ऐतिहासिक प्रक्रिया: कोणार्क मंदिर के मुख्य मंडप (जगमोहन) को सुरक्षित रखने के लिए अंग्रेजों ने 1903 में इसे पूरी तरह से रेत से भर दिया था और सभी द्वारों को सील कर दिया था। पिछले 119 वर्षों से यह हिस्सा बंद था। अब ASI इस रेत को बाहर निकालने की दिशा में काम कर रहा है ताकि मंदिर की आंतरिक संरचना का निरीक्षण किया जा सके। 2. संरक्षण अभियान और अध्ययन: वैज्ञानिक जांच: CBRI (सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट), रुड़की के वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक तकनीकों जैसे 'ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार' (GPR) और 'लेजर स्कैनिंग' का उपयोग करके अध्ययन किया है। सुरक्षा का आकलन: विशेषज्ञों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रेत निकालने से मंदिर की बाहरी दीवारों या ढांचे पर कोई बुरा असर न पड़े। 3. क्यों भरी गई...